गुरुवार, २३ फेब्रुवारी, २०१७

इस शहर में कुछ ख़ास तो हैं....

इस शहर में कुछ बात तो हैं
इस शहर में कुछ ख़ास तो हैं
बारिशें यहाँ की बकवास...सड़कें यहांकी बकवास....ट्रॅफिक तो माशाल्ला सुपर बकवास...
......
हँसी आती हैं मेरे उस झल्लाहट, उस खीज़ पर आज
जब किसी और की नज़रों सें देखती हूँ इस शहर को आज
अब तो यही बसने को दिल करता हैं
घर इसीको कहेने का दिल करता हैं
इस शहर में कुछ बात तो हैं
इस शहर में कुछ ख़ास तो हैं
कभी ईमली कभी शहद...कभी रिमझिम तो कभी गरज
इन गलियों सें दिल का रिश्ता तो हैं
अनकहा, शर्मिला, छुईमुईसा सही
इस शहर सें लेकिन मुझको प्यार तो हैं...